भुवनेश्वर, 02/03/2026: अधिकारिता तब सबसे अधिक सार्थक होती है जब उसकी शुरुआत जमीनी स्तर से होती है; शिक्षा तक पहुंच, आत्मविश्वास का विकास और अपने क्षेत्र में ही रोजगार और प्रगति के अवसरों के साथ। लांजीगढ़ में वेदांता एल्युमिनियम इसी दिशा में निरंतर प्रयासरत है। शिक्षा में निवेश और स्थानीय रोजगार अवसरों के माध्यम से कंपनी क्षेत्र की युवा महिलाओं के लिए नए करियर के रास्ते खोल रही है।
प्रियंका महाखुद की कहानी इस परिवर्तन का जीवंत उदाहरण है। लांजीगढ़ में जन्मी और पली-बढ़ी प्रियंका ने यूकेजी से कक्षा 12 तक वेदांता डीएवी इंटरनेशनल स्कूल में शिक्षा प्राप्त की, जो क्षेत्र का पहला अंग्रेजी माध्यम विद्यालय है। उस समय स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा सीमित थी, ऐसे में यह विद्यालय उनके लिए व्यापक शैक्षणिक अवसरों का द्वार बना।
समय के साथ यह संस्थान आधारभूत संरचना और छात्र संख्या दोनों में विकसित होकर क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन गया है। प्रियंका अपने परिवार की पहली सदस्य बनीं जिन्होंने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की। इससे उनके परिवार में उच्च शिक्षा के प्रति नई जागरूकता आई। आज उनकी बहन कटक में विधि की पढ़ाई कर रही हैं और भाई भुवनेश्वर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं।
भुवनेश्वर स्थित महर्षि कॉलेज ऑफ नेचुरल लॉ से प्राणी विज्ञान (जूलॉजी) में बी.एससी. (ऑनर्स) की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रियंका ने अपनी शैक्षणिक यात्रा जारी रखी। वर्तमान में वह बायोटेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई दूरस्थ माध्यम से कर रही हैं और साथ ही एक महत्वपूर्ण तकनीकी दायित्व निभा रही हैं।
आज वह वेदांता की एल्यूमिना रिफाइनरी के सबसे अहम विभाग, डिस्ट्रिब्यूटेड कंट्रोल सिस्टम (DCS) के नियंत्रण कक्ष में कार्यरत हैं, जिसे संयंत्र संचालन का केंद्रीय तंत्र माना जाता है। नियंत्रण कक्ष ऑपरेटर के रूप में प्रियंका तापमान, दबाव, प्रवाह और स्तर जैसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानकों की निगरानी वास्तविक समय डिजिटल प्रणाली के माध्यम से करती हैं। वह अलार्म संकेतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करती हैं, ‘शून्य ओवरफ्लो’ और ‘शून्य ट्रिप’ की स्थिति बनाए रखने पर ध्यान देती हैं तथा संभावित व्यवधानों को बढ़ने से पहले ही नियंत्रित करती हैं। यह दायित्व सटीकता, विश्लेषणात्मक क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की मांग करता है।
मुख्य उत्पादन नियंत्रण कक्ष में उनकी भूमिका एक महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान माने जाने वाले औद्योगिक क्षेत्र में अब स्थानीय समुदायों की महिलाएं भी उच्च जिम्मेदारी वाली तकनीकी भूमिकाएं निभा रही हैं।
प्रियंका जैसी यात्राएं यह दर्शाती हैं कि शिक्षा और कौशल विकास में निरंतर निवेश किस प्रकार स्थानीय स्तर पर सार्थक करियर में परिवर्तित हो सकता है। लांजीगढ़ के पहले अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की छात्रा से लेकर रिफाइनरी के केंद्रीय नियंत्रण तंत्र का संचालन करने तक की उनकी यात्रा यह साबित करती है कि अवसर जब स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराए जाते हैं, तो महिलाएं केवल सहभागी ही नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता भी बनती हैं।
शिक्षा और समावेशी रोजगार पर केंद्रित प्रयासों के माध्यम से वेदांता एल्युमिनियम यह सुनिश्चित कर रहा है कि लांजीगढ़ की युवा महिलाएं केवल अवसरों की आकांक्षा न करें, बल्कि अधिकारिता के साथ उन्हें प्राप्त कर औद्योगिक विकास और सामुदायिक प्रगति में सक्रिय भूमिका निभाएं।

